इनके लिए शब्द ढुढना मुश्किल होता है कि कैसे बतायें कि इतनी खुबी है कि शब्दों में बाधंना मुश्किल लगता हैं कोई एक शब्द में डिस्क्राइब कर सकता है कुमारजी को
]]>Yeah! Simple man with high execution. The most true fact of his personality poetry in his attitude, altitude in his style, aptitude in his behavior and gratitude in his language. These four factor make him a complete human being. I’m saying all that with confidence because it was my fortune that when I met him. I scribble sometime just because of him……so I would like to say he is a reason for change.
Love to read it.
thanks
Priya
]]>And thank you Tarun for bridging the gap between ‘been there, done that’ and the dreamers. Kudos to you.
]]>मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है !!!
समुँदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आसुँ प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता ,
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता !!!
मुहब्बत एक एहसानों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूँ हैं
जो तू समझे तो मोती है जो न समझे तो पानी है !!!
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हँगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पला बैठा तो हँगामा,
अभी तक डूब कर सुनते थे हम किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हक़ीक़त में बदल बैठा तो हँगामा !!!